नागालैंड राज्य का इतिहास किस प्रकार रहा है , इसका विस्तार और संस्कृति – History of Nagaland State

  • नागालैंड राज्य का इतिहास
  • वर्मा का अधिकार नगालैंड पर।
  • वर्मा व अंग्रेजों का युद्ध ।
  • अंग्रेजी शासन के अंदर किस प्रकार रहा नागालैंड
  • नागालैंड पर कब्जा की रणनीति।

नागालैंड राज्य का इतिहास
1 दिसंबर 1963 में नागालैंड भारत का 16 वा राज्य बना । नागालैंड राज्य जिसका नाम वहां रहने वाले नागा जनजाति के निवास होने के कारण पड़ा, जिनके बारे में इतिहास पर बताया गया है कि यह जनजाति चीन के उत्तर – पूर्व के येलो और यांग्लजे नदी की तरफ से आए हैं।
19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों के आगमन के साथ ब्रिटिश राज्य ने अपना क्षेत्र का विस्तार किया। परंतु वहां नागा पहाड़ी में रहने वाले समुदाय पर कभी कब्जा नहीं कर पाई क्योंकि यह समुदाय शक्तिशाली थे और इनमें किसी का अधिकार हो ऐसा उन्हें पसंद नहीं था।

वर्मा का अधिकार नगालैंड पर।
1816 के समय बर्मा के वमन वंश की नजर इन समुदाय पर पड़ी । असम में आक्रमण करके अपना बर्मन वंश की नींव रखी ।( नागालैंड तब असम का हिस्सा था ) इसलिए यह भी वमन के अधीन हो गया ।

वर्मा व अंग्रेजों का युद्ध ।
अंग्रेजी शासन यहां अपना अधिकार करना चाहती थी इसलिए अंग्रेजी शासन व वर्मन वंश के बीच 1824 से लेकर 1826 तक युद्ध चला
जिसके बाद अंग्रेजी शासन ने विजय प्राप्त की। जिसके यांदबो की संधि हुई।

अंग्रेजी शासन के अंदर किस प्रकार रहा नागालैंड
युद्ध में विजय के बाद अंग्रेजी शासन ने असम को ब्रिटिश भारत में मिला दिया जिसमें नागालैंड भी शामिल था। जिसके बाद कैप्टन जेंकिंग और कैप्टन पेनबर्टन ने 1832 में नागा पहाड़ियों में पहले ब्रिटिश के रूप में आए ।
ब्रिटिश शासन नागालैंड व असम और मणिपुरी के बीच रास्ता बनाना चाहते थी। जिसमें नागा समुदाय ने मना कर दिया और अंग्रेजों को इस समुदाय के सामने झुकना पड़ा ।
1839 से लेकर 1850 तक कई कोशिश किया परंतु हमेशा ये समुदाय से विफल रहे ।

नागालैंड पर कब्जा की रणनीति।
अंग्रेजों द्वारा 1866 में नागालैंड के चुमौकेदिमा में मुख्यालय बनाया जहां अंग्रेजी शासन ने नागा जनजातियों से हाथ मिलाने की कोशिश की। परंतु उन्होंने हमेशा विरोध किया
1878 में अंग्रेजों ने अब मुख्यालय कोहिमा स्थापित किया जिससे नागालैंड के प्रशासन वह संस्कृति को केंद्र में रखकर चल रहे थे ।
जहां 1879 में खोनोमां वाले क्षेत्र पर अधिकार करने पर नागा समुदाय ने अंग्रेजों को बुरी तरह से हराकर । उन्हें वापस जाने को मजबूर कर दिया ।
जहां दोबारा अंग्रेजों ने नागा हिल से के बड़े भाग पर अपना अधिकार किया । 1892 मे तुएनसांग क्षेत्र को छोड़कर संपूर्ण नागालैंड में अंग्रेजों ने अधिकार कर दिया। इस समुदाय पर अधिकार करने के बाद अंग्रेजों ने उनके संस्कृति और सभ्यता पर टारगेट किया , ताकि उन्हें उत्साह सके । अंग्रेजों ने पशु बलि और उनके काफी अधिकारों को खत्म कर दिया ।
जिसके बाद इन्होंने अंग्रेजों के लिए विद्रोह किया पर अंग्रेजों के बंदूक के सामने यह नहीं चल सके इसके बाद नागालैंड पूरी तरह से अब अंग्रेजों के अंदर थी।
अंग्रेजी शासन के आने पर यहां के लोग पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ने लगे और अपने समुदाय की संस्कृति को भूलने लगे थे । ( एशिया का सबसे बड़ा चर्च भी नागालैंड में ही है )
नागा क्लब की स्थापना।
1918 में नागा समुदाय ने आपस में मिलकर नागा क्लब की स्थापना की। इन्होंने 10 जनवरी 1929 में साइमन के सामने अपनी मांग को रखा । जिसमें इन्होंने कहा इनपे ( नागाओ पर ) किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाया जाए और अंग्रेजों को नागालैंड से जाने के लिए कहा, नागा हमेशा खुद को आजाद रखना चाहते थे।
जिसके बाद 1935 act के बाद नागा समुदाय के लोगो ने नगालैंड में स्वतंत्र शासन शुरू किया।

भारत की आजादी के बाद नागालैण्ड ।
1946 में अंगमी जपो के द्वारा लोग नेशनल काउंसिल की स्थापना की गई। क्योंकि नागा समुदाय अपने पैतृक व मूल संस्कृति को छोड़ना नहीं चाहती थी। इसलिए अंगमी जपो के द्वारा अलग देश की मांग की गई।
नेहरू ने नागा पहाड़ी के समुदाय जनजाति असामेस, गारो, लुशाई, अवोर, मेतीस से बातचीत करनी चाही। 14 अगस्त 1947 में नागा नेशनल काउंसिल के नेतृत्व में अंगमी जपो ने नागालैंड की घोषणा कर दी । अंगमी जपो का कहना था नागालैंड अपना अलग देश बनाएगी।
इसके बाद NNC ( Naga National Council ) के द्वारा हिंसक फैलाया जाने लगा 1952 में अंगमी जपो के लोगो ने NFA ( Naga Federal Army ) का गठन किया। जिसके बाद इन्होंने 1953 में भारत सरकार के खिलाफ सावज्ञा अवज्ञा रणनीति भी इस्तमाल किया। इसके बाद भी हिंसा बढ़ने लगी
1956 में NNC ने अपनी सरकार की घोषणा कर दी जिसके बाद इंडियन आर्मी और NFA के बीच विवाद रहा।
बाद में 1961 में नेहरू की अध्यक्षता में नागाओ के बीच एक रास्ता निकाला । जिससे 16 पॉइंट एग्रीमेंट कहा गया ।
जहां नागालैंड को एक राज्य का दर्जा देने की बात कही जिसके बाद 1 दिसंबर 1963 में को नागालैण्ड राज्य का दर्जा मिला ।

नागालैंड में 1980 को NSCN ( National Socialist Council of Nagaland ) का गठन हुआ। नागालैंड में जिसका नेतृत्व इसाक चिशी स्वू , थुइंगलेंग मुइवा , शांगवांग शांगयुंग खापलांग थे।
जिनका उद्देश्य रिपब्लिक ऑफ नागालैंड बनाना था । बाद में 1988 में NSCN में विवाद के बाद यह दो गुटों में बाट गया ।
जहां शांगवांग शांगयुंग खापलांग के गुट को NSCN– K कहा गया। इसाक चिशी स्वू , थुइंगलेंग मुइवा के गुट को NSCN –IM कहा गया । इसका उद्देश्य ग्रेटर नागालैंड बनाया था
1997 में NSCN के साथ सरकार ने एक समझौता किया जिसके बाद सरकार NSCN के लोगो को दखल नही करेगी। जिससे यह लड़ाई में विराम रहा जो कि अभी तक का है।

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