फ्रांसीसी क्रांति :– फ्रांस की क्रांति के प्रमुख कारण और इसका इतिहास। french revolution and complete history

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  • फ्रांस की क्रांति के बारे में।
  • फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत
  • फ्रांस जो की तीन स्टेट में बांटा गया था
  • आर्थिक स्थिति का कमजोर पढ़ना
  • फ्रांस की क्रांति के अन्य कारण क्या रहे
  • फ्रांसीसी क्रांति के कुछ चरण इस प्रकार है
  • फ्रांस के युद्ध में दार्शनिकों और लेखकों की भूमिका किस प्रकार रही।
  • मॉन्टेस्क्यू , वोल्टेयर ,रूसो के विचार

फ्रांस की क्रांति के बारे में।
फ्रांस के इतिहास में जो भी राजनीतिक और सामाजिक उत्तल-पुथल हुई, जिसे हम फ्रांसीसी क्रांति के नाम से जानते हैं इस क्रांति के द्वारा फ्रांस के राजा को गद्दी से हटाया गया था । तथा फ्रांस में जिसका राजतंत्र था। उसकी हार हुई । इसके कारण संपूर्ण विश्व में गणतंत्र की मांग ही हुई जो की फ्रांस की क्रांति से हुई उठी। फ्रांस की क्रांति के कुछ कारण रहे जो की आगे बताए गए हैं।

फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत ।
फ्रांस में राजतंत्र का शासन था तथा राजा के द्वारा निरंकुश और स्वेच्छा अनुसार शासन किया जाता था। लुई 14वा (1643–1715) के शासन काल से ही राजा की निरंकुशता बढ़ने लगी । लुई 14वा द्वारा कहे शब्द– “मैं ही राज्य हूं मेरे शब्द ही कानून है ।”
राजा द्वारा इच्छा अनुसार कानून बनाए जाते थे, राजा के बाद के उत्तराधिकारी लुई 15वा और लुई 16वा जो की एक अयोग्य शासक के रूप में जाने जाते हैं। लुई 15वे के शासन काल में सप्त वर्षीय युद्ध और ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकारी के युद्ध में फ्रांस की आर्थिक स्थिति बुरी तरह से डगमगा गई थी।

लुई 16वा (1774 –93) जो कि एक अयोग्य शासक था। लुई 16वे की पत्नी मैरी एंटोइट एक बार जुलूस में निकली । तब गरीब जनता द्वारा रोटी की मांग की गई तो उसने कहा – “रोटी उपलब्ध नहीं है तो केक को क्यों नहीं खाते” जिससे जनता में काफी आक्रोश उत्पन्न हुआ तथा एक अयोग्य रानी के रूप जाना जाने लगा।

फ्रांस जो की तीन स्टेट में बांटा गया था जो :–
प्रथम स्टेट :– इसमें पादरी वर्ग और उच्च वर्ग के धनी लोग थे, अब पादरी लोगों को धार्मिक कार्यों में कोई रुचि नहीं थी । पादरी वर्ग कर देने से मुक्त थे।

द्वितीय स्टेट :– द्वितीय स्टेट में कुलीन वर्ग आता था। इसमें सेना, न्यायालय आदि विभाग भी सम्मिलित थे । ये लोग करो को भी वसूला करते थे। यह स्टेट भी कर देने से मुक्त था। यह भी संपन्न वर्ग में से एक था।

तृतीय स्टेट :– इस वर्ग में जनसाधारण लोग शामिल थे । जिसमें मध्य वर्ग और मजदूर, व्यापारी , बुद्धिजीवी लोग आते थे। ये लोग उच्च वर्ग ( पादरी व कुलीन वर्ग ) के लोगों से घृणा करते थे । इनकी संख्या सर्वाधिक थी फ्रांस में । जिसमें राजा के द्वारा सभी प्रकार के करो को इन्हीं वर्ग के लोगों पर लगाया जाता था।

आर्थिक स्थिति का कमजोर पढ़ना
फ्रांस की क्रांति का प्रमुख कारण आर्थिक स्थिति का बिगड़ना भी था। जहां फ्रांस के राजा द्वारा फिजूल खर्ची और लुई 14वे के युद्ध के कारण कोष का खाली होना । लुई 15वे के सप्त वर्षीय युद्ध तथा ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकारी युद्ध में काफी धन की हानि होना। जो फ्रांस की आर्थिक स्थिति को काफी कमजोर कर गई । जिसके बाद फ्रांस कर्ज के बोझ में दबने लगा , जिसके कारण 1789 में स्टेट जनरल की बैठक का आगमन किया जाने लगा । जिसे फ्रांस की क्रांति की शुरुआत माना गया ।

फ्रांस की क्रांति के अन्य कारण क्या रहे।
लुई 16वा के समय तक आते-आते फ्रांस की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह से ऋण में डूब चुकी थी। कुलीन वर्ग पर कर लगाने की बात कहीं जाने लगी, जिसमें कुलीन लोगों ने यह देने से मना कर दिया। क्योंकि पहले कर केवल तृतीय स्टेट के लोग ही देते थे। जिसके कारण स्टेट जनरल की बैठक कराई जाने लगी 1789 में । यह बैठक 175 वर्ष बाद हो रही थी, इस बैठक में तृतीय स्टेट के लोग भी थे। क्योंकि इनमें वह अपने विचारो को रखेंगे। तृतीय स्टेट जो की बहुत संख्या में थे फ्रांस में । पर यह अल्पमत में आते थे यह चाहते थे कि सभी कार्यों को बहुमत के साथ कराए जाए । जिसने तृतीय स्टेट भी था । इसके बाद प्रथम स्टेट तथा द्वितीय स्टेट इससे खुश ना थे। इसलिए तृतीय स्टेट को बहिष्कार कर दिया ।
जरनल स्टेट की बैठक से पूर्णता तृतीय स्टेट को बहिष्कार कर दिया । जिससे इन लोगो द्वारा पास के टेनिस कोर्ट में अपने लोगों द्वारा एक सभा बुलाई गई । 20 जून 1789 में इन्होंने घोषणा की। कि हम कभी अलग नहीं होंगे और जब तक संविधान नहीं बन जाता तब तक एक साथ रहेंगे। राजा ने इन क्रांतिकारियों को बस्तील के किले में ले जाकर बंद कर दिया गया। जिससे जनता को यह खबर लगी तथा लोगो द्वारा 14 जुलाई 1789 में पेरिस की भीड़ ने कैदियों को। जो क्रांतिकारी थे उन्हें बस्तील के जेल से मुक्त कर दिया । इसी दिन को (14 जुलाई ) को फ्रांस में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया ।

फ्रांसीसी क्रांति के कुछ चरण इस प्रकार है :–
1– प्रथम चरण ( 1789 –1792) – इस चरण पर पेरिस की भीड़ ने बस्तील पर कब्जा कर दिया। इसी प्रकार क्रांति की शुरुआत की गई , इसका प्रभाव फ्रांस की ग्रामीण क्षेत्रों में भी पड़ा जिससे राष्ट्रीय सभा पर भी असर पड़ा ।राष्ट्रीय सभा का कार्य संविधान निर्माण करना था , इसी को ही संविधान सभा कहा गया बाद में। 26 अगस्त 1789 को मानवाधिकार की घोषणा की । राष्ट्रीय संविधान सभा ने लिखित संविधान तैयार किया । जिसे 1791 में लुई 16वे ने अपनी स्वीकृति दे दी, इसमें लिखा था प्रणाली राजतंत्रात्मक बनी रहे, पर राजा की शक्ति को सीमित कर दिया गया।

2– द्वितीय चरण (1792 – 94)– राष्ट्रीय सभा को भंग करने के बाद व्यवस्थापिका सभा बनाई गई। जिसमें 745 सदस्य थे, इसमें व्यवस्थापिका सभा के दाहिने हाथ की ओर बैठने वाले दक्षिण पंथी तथा बाएं हाथ वाले वाम पंथी कहलाते । फ्रांस की क्रांति का भय अब पूरे यूरोप में होने लगा , कई पादरी वर्ग यूरोप के अन्य भाग में चले गए जिससे फ्रांस के क्रांतिकारी और अन्य देशों के साथ संबंध बिगड़ने लगा। ऑस्ट्रिया ने फ्रांस के कुलीन वर्ग के लोगों को जो राजतंत्र के समर्थक थे उन्हें अपने देश में रहने के लिए जगह दिया। जिससे ऑस्ट्रिया के साथ युद्ध की घोषणा हुई जिसमे फ्रांस की हार हुई इस युद्व में।

3– तृतीय चरण (1774 – 99) – इस चरण में डायरेक्टरी का शासन आया , जिनके द्वारा संविधान का निर्माण करके कार्यपालिका को 5 सदस्य निदेशक मंडल को दे दिया गया। इसके बाद फ्रांस में इनका शासन चलने लगा क्योंकि यह भ्रष्ट और अयोग्य व्यक्ति थे । इन्होंने 1795–99 तक फ्रांस में शासन किया। इसके बाद नेपोलियन ने इसका अंत किया और डायरेक्टरी का अंत करके फ्रांस पर सत्ता निर्माण स्थापित किया ।

4– चतुर्थ चरण (1779 से 1811)– इसमें नेपोलियन द्वारा डायरेक्टरी का अंत करके खुद सत्ता संभाली तथा फ्रांस का प्रथम काउंसलर बना। 1804 में नेपोलियन ने अपने को सम्राट घोषित कर दिया।

फ्रांस के युद्ध में दार्शनिकों और लेखकों की भूमिका किस प्रकार रही।

1 – मॉन्टेस्क्यू (1689–1755) –यह एक लेखक थे । जिन्होंने अपनी पुस्तक द स्पिरिट आफ लॉ में राजा के देवी अधिकारों को खंडन किया। इन्होंने कहा कि यह एक निरंकुश शासक हैं जिसमें राजा के ही पास सभी अधिकार हैं इनके द्वारा कहा गया की शक्ति का पृथक्करण हो । जिसमें शासन के तीन अंग – कार्यपालिका , न्यायपालिका, विधायिका के पक्ष में सलाह दी गई। शक्ति के इन पृथक्करण की बात कह जाने पर द स्पीड ऑफ लॉ बहुत प्रसिद्ध पुस्तक बन गई। जिसने 3 वर्ष में इसके छह संस्करण प्रकाशित हुए । इनके इन किताबो में ना तो क्रांति की बात कही। ना ही राजतंत्र को सामंत की माग कही गई। इसलिए मॉन्टेस्क्यू प्रसिद्ध बन गए फ्रांस में।

2 – वोल्टेयर ( 1694 से 1778 ) – इनके द्वारा भी लेटर्स ऑन द इंग्लिश पुस्तक में ब्रिटेन की आजादी और धर्म विचार का अच्छा चित्रण किया और फ्रांस की व्यवस्था को में कमियो की उल्लेख किया गया । ये एक ईसाई थे इन्होंने भ्रष्टाचार का विरोध किया, फ्रांस को ये इंग्लैंड के शासन व्यवस्था की तरह बनाना चाहते थे फ्रांस को देखकर वोल्टेयर के द्वारा कथन कहा – मैं सौ चूहा के स्थान पर एक सिंह का शासन पसंद करता हूं।

3– रूसो– रूसो ने अपनी पुस्तक में एमली और रूसोनी में मानव की स्वतंत्रता की बात कही, रूसो के द्वारा एक कुशल राजा के कर्तव्यों और उनके कार्यों को बताया गया। रूसो ने क्रांति की बात नहीं कहीं पर उनके द्वारा फ्रांसीसी क्रांति में नारा कहा वह स्वतंत्रता , समानता, बंधुता के बारे में था। जिससे सभी लोग प्रभावित हुए नेपोलियन द्वारा उनके महत्व को स्वीकार किया गया उन्होंने कहा कि – यदि रूसो नहीं होते तो फ्रांस की क्रांति नहीं होती।

14 thoughts on “फ्रांसीसी क्रांति :– फ्रांस की क्रांति के प्रमुख कारण और इसका इतिहास। french revolution and complete history”
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