भीमराव आंबेडकर के जीवन के बारे में जानकारी ( आत्मकथा ) :– Bhimrav Ambedkar biography

  • भीमराव आंबेडकर के जीवन के बारे में कुछ शब्द :
  • बाबा साहब की प्रारंभिक जीवन के बारे में
  • बाबा साहब की शिक्षा से जुड़े बाते
  • बाबा साहब का राजनीतिक जीवन
  • संविधान निर्माण में बाबा साहब का योगदान
  • बाबा साहब के जीवन के अंतिम समय

भीमराव आंबेडकर के जीवन के बारे में कुछ शब्द :
बाबा साहब का पूरा नाम भीमराव राम जी आंबेडकर है, जो एक अर्थशास्त्र, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक के साथ एक ज्ञानी व्यक्ति थे । इन्होंने दलितों व पिछले वर्गों के लिए होने वाले सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध कहीं अभियान चलाए। बाबा साहब को भारतीय संविधान का जनक और भारतीय गणराज्य के निर्माताओ में से एक थे ।
बाबा साहब ने कोलंबिया विश्वविद्यालय व लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है और राजनीतिक विज्ञान में शोध कार्यों में भी कार्य किया हैं,बाबा साहब द्वारा भारत के स्वतंत्रता और दलितों की सामाजिक स्वतंत्रता में वकालत तथा भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान किया है ।
अंत इसके द्वारा 1951 में बौद्ध धर्म को अपना लिया। बाद में 1990 में इन्हे मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मान दिया गया है।

बाबा साहब की प्रारंभिक जीवन के बारे में:
बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश में स्थित महु नगर के सैन्य छावनी में हुआ था । ये अपने माता-पिता की अंतिम और 14 संतान थे, बाबा साहब महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के आंबडवे गांव के मूल निवासी थे । इनके पिता का नाम राम जी सकपाल था जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सेना में थे, इसलिए ये महु में सेनारत थे।
पढ़ाई में अच्छे होने के बाद भी भीमराव को छुआ–छूत के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ता था । क्योंकि ये नीची जाति के थे ऐसा माना जाता था ।
बाबा साहब के गांव का नाम आंबडवे था, बाबा साहब इस गांव से संबंध रखते थे इसलिए इनके पिता द्वारा बाबा साहब के हाई स्कूल में आंबडवे उपनाम लिखवाया था बाद में बाबा साहब को यह उपनाम आंबडवे से आंबेडकर एक ब्राह्मण शिक्षक कृष्ण केशव ने दिया, जो कि उन्हें बहुत स्नेह करते थे । तब से बाबा साहब को आंबेडकर नाम से जाना जाता है। 1906 में जब भीमराव आंबेडकर 15 वर्ष के थे तब उनका विवाह रमाबाई से कर दिया जो कि उसे समय 9 साल की थी। बाबा साहब तब पांचवी कक्षा में पढ़ते थे उन दिनों बाल विवाह का प्रचलन हुआ करता था।

बाबा साहब की शिक्षा से जुड़े बाते
बाबा साहब ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सातारा नगर में राजवाड़ा चौक पर स्थित शासकीय हाई –स्कूल से की । 1907 में इन्होंने मैट्रिक पास करके अगले वर्ष एल्फिस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया, जिसका संबंध बांबे विश्वविद्यालय से था
1912 तक इन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान से B.A की डिग्री प्राप्त की है ।
1913 में जब बाबासाहेब 22 वर्ष के थे ये USA चले गए। इन्हे बडौदा के गायकवाड द्वारा कोलंबिया विश्वविद्यालय से M.A. की डिग्री के लिए 3 वर्ष के लिए 11.5 डॉलर प्रति माह छात्रवृत्ति प्रदान हुई । इनके प्रमुख विषय अर्थशास्त्र , समाजशास्त्र , इतिहास आदि थे। 1916 में इन्होंने अर्थशास्त्र की PhD प्राप्त कर ली । इन्हे तीन वर्ष की छात्रवृत्ति मिलने पर 2 वर्ष में ही सभी अमेरिकी शिक्षा पूरा करके 1916 में बाबासाहब लंदन चले गए।
1916 में इन्होंने लंदन में बैरिस्टर कोर्स के लिए प्रवेश लिया और लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट थिसिस में कार्य करना शुरू कर दिया । 1917 में छात्रवृत्ति के खत्म होने पर इन्हे भारत वासी करना पड़ा था । कुछ समय भारत में इन्होंने मुंबई के एक कॉलेज में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर के रूप में नौकरी मिली ।
1920 में अपने आपसी मित्रों के सहयोग से ये दोबारा इंग्लैंड चले गए , 1921 में इन्होंने M.SC की डिग्री प्राप्त की। फिर 1922 में इन्होंने बैरिस्टर-एट-लॉज की डिग्री प्राप्त की , जिसे बाद इन्हे ब्रिटिश बार में बैरिस्टर के रूप में प्रवेश मिला। 1923 में अर्थशास्त्र में ( डॉक्टर ऑफ साइंस ) की उपाधि प्राप्त हुई ।
इसकी थिसिस ( रुपये की समस्या: इसकी उत्पत्ति और इसका समाधान ) पर था ।
बाबासाहब लौटते समय जर्मन में 3 महीने के लिए रुके, वहां इन्होंने अपना अध्ययन बॉन विश्वविद्यालय में जारी रखा । इनकी तीसरी और चौथी डॉक्टरेट्स ( L.L.D. कोलंबिया विश्वविद्यालय 1952 ) से और ( D. Litt उस्मानिया विश्वविद्यालय 1953 ) से सम्मानित उपाधिया थी। बाबा साहब के पास कुल 32 डिग्री थी।

बाबा साहब का राजनीतिक जीवन
बाबा साहब बड़ौदा के रियासत राज्य द्वारा शिक्षित थे, इसलिए बाबा साहब महाराज के सैन्य सचिव नियुक्त किये गये थे। जातिवाद और भेदभाव होने से उन्हें नौकरी छोड़ने पड़ी बाद में ये एक निजी शिक्षक के रूप में कार्य किया। ये सब विफल रहे उनके जीवन में ।1918 में ये एक राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने मुंबई में। वहां भी अन्य शिक्षकों के साथ उठना बैठना नहीं कर पा रहे थे।
बाबा साहब ने दलित व जातिगत भेदभाव पर होने पर कहीं आलोचनाएं भी की है 1925 में इन्हें यूरोपीय सदस्यों के साथ साइमन कमीशन में काम करने की नियुक्ति मिल गई थी।
1927 तक बाबा साहब ने छुआछूत के विरुद्ध आंदोलन करना का निर्णय किया । इन्होंने समाज में हो रहे भेदभाव और अछूतों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करना शुरू कर दिया।
अब बाबा साहब यह राजनीतिक हस्ती बन गए थे । उन्होंने महात्मा गांधी तथा राष्ट्रीय कांग्रेस की आलोचना की। बाबा साहब की लोकप्रियता बढ़ने से 1931 में इन्हें गोलमेज सम्मेलन की बैठक में निमंत्रण किया गया ।जहां बाबा साहब ने दलितों के लिए अलग निर्वाचन की मांग की । जब दलितों के लिए अलग निर्वाचन की बात हुई तो गांधी जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसको खारिज करने की कोशिश की। पर उनकी बातो पर किसी ने ध्यान नही दिया। इसलिए गांधी जी अनशन पर बैठ गए। गांधी जी के प्राणों को संकट में देखकर सभी हिंदू समाज बाबा साहब के विरोधी बन गए थे।
इसलिए बाबा साहब ने 24 सितंबर 1932 में गांधी और बाबासाहब के बीच समझौता हुआ जिसे हम पूना पैक्ट कहते हैं। जिसमें दलितों के लिए छूट देने की बात कही. ।

संविधान निर्माण में बाबा साहब का योगदान :

बाबा साहब द्वारा कांग्रेस की आलोचना करने के बाद भी वे बाबासाहब को एक प्रतिष्ठ व्यक्ति मानते थे । इसलिए आजादी के बाद भी कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया। 29 अगस्त 1947 में संविधान की रचना के लिए अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया था। अंबेडकर ने लगभग 60 देश के संविधान का अध्ययन किया ।
बाबा साहब को भारत के संविधान का पिता के रूप में कहा गया है , इनके द्वारा (S.C.) , (S.T.) , (O.B.C.) के लिए आरक्षण की व्यवस्था शुरू के लिए असेंबली का समर्थन जीता । संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1950 को संविधान को अपनाया गया। बाबा साहब 370 के विरुद्ध विरोध में थे जिसमें जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा मिला था जो मोदी सरकार ने अब खत्म कर दिया ।

बाबा साहब के जीवन के अंतिम समय
1940 में इनकी पहली पत्नी के निधन होने के बाद बाबा साहब ने 1948 में सविता अंबेडकर से शादी कर ली । 1948 से ही बाबा साहब मधुमेह से पीड़ित थे। बाबा साहब लंबे समय तक बीमार होने के कारण 6 दिसंबर 1956 में उनका निधन हो गया।

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