मेजर ध्यानचंद की जीवन परिचय :– हॉकी का जादूगर ।Biography of Major Dhyanchand

  • मेजर ध्यानचंद की प्रमुख बाते
  • मेजर ध्यानचंद की प्रारंभिक जीवन
  • मेजर ध्यानचंद सेना में भर्ती
  • मेजर ध्यानचंद का ओलंपिक में प्रदर्शन।
  • लॉस एंजेलिस ओलंपिक 30 जुलाई 1932
  • बर्लिन ओलंपिक 15 अगस्त 1936

मेजर ध्यानचंद की प्रमुख बातें
मेजर ध्यानचंद एक सफल हॉकी खिलाड़ी थे, जिन्हें हम हॉकी का जादूगर और महान हॉकी खिलाड़ी के नाम से जानते हैं । इनका जन्म प्रयागराज में हुआ।
इनके द्वारा 1926 से 1949 तक कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी मैच खेले गए। जिसमें इनके द्वारा 185 मैच में 570 गोल किए गए और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खेलों के गोलों को मिलाकर इन्होंने 1000 से अधिक गोल किए। इनके इस योगदान और सम्मान से भारत सरकार द्वारा 1956 में भारत सरकार द्वारा इन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण दिया गया। इनके जन्मदिवस के दिन 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

मेजर ध्यानचंद की प्रारंभिक जीवन
ध्यानचंद का पूरा नाम ध्यानचंद सिंह था। इसका जन्म 29 अगस्त 1905 में इलाहाबाद में हुआ। इनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना में थे। जो कि हॉकी के एक अच्छे खिलाड़ी भी थे जिन्होंने सेना के लिए भी हॉकी खेला था । पिता के सेना में सिपाही के कारण इन्हें अलग-अलग स्थान में जाने पढ़ता था ।
अंततः 6 साल तक स्कूली शिक्षा करने के बाद यह पूर्णत झांसी U.P. में बस गए।
इन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पड़ा 1932 में विक्टोरिया कॉलेज से स्नातक पास की।

मेजर ध्यानचंद सेना में भर्ती
ये 17 साल में ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए उन्होंने 1922 से 1926 तक सेना के लिए काफी टूर्नामेंट खेले।
1924 में पंजाब इन्फेंट्री टूर्नामेंट में से ही इनका नाम हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा ।
क्योंकि इनके द्वारा अंत के 4 मिनट में 3 गोल करके सभी को हैरान कर दिया।
खेलो में अच्छा प्रदर्शन के कारण सेना में इनकी रैंक बढ़ा दी गई। जिससे यह लांस नायक बन गए थे। सेना के टूर्नामेंट में अच्छा खेलने से इन्हें भारतीय टीम में चुन लिया गया।
इनका पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट 1926 में न्यूजीलैंड के साथ खेला गया। जिसमें 21 मैचों में से 18 मैचों में जीत मिली। तथा 2 मैचो में टाई रहा।

मेजर ध्यानचंद का ओलंपिक में प्रदर्शन।


मेजर ध्यानचंद के खेल का कोई तोड़ नहीं था। इसी के साथ 1928 में ओलंपिक खेलों में भारत ने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता ।जिसमें नीदरलैंड को 3–0 से हराया । इस मैच में मेजर ध्यानचंद ने अकेले 2 गोल किए।

लॉस एंजेलिस ओलंपिक 30 जुलाई 1932
इसमें भी भारत विजेता रहा । जहां उपविजेता अमेरिका रहा । इसमें अमेरिका 24–1 के साथ हारा । जिसमें अकेले ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे।

बर्लिन ओलंपिक 15 अगस्त 1936
इसमें भी भारत विजेता रहा । जहां उपजेता जर्मनी रही। इसमें जर्मनी 8–1 से हारी जिसमें ध्यानचंद ने तीन गोल किए । इस मैच में हिटलर भी था। हिटलर ने खेलते देखा। और उन्हें जर्मनी में उच्च सेना में अधिकारिक के पद का ऑफर दिया। जिसे ध्यानचंद ने मना कर दिए।
जब हिटलर ने ध्यानचंद सिंह से पूछा तुम्हें भारत ने क्या दिया है ? ध्यानचंद ने कहा–

मेरे देश की जिम्मेदारी नहीं है
मुझे आगे बढ़ाने की
यह मेरी जिम्मेदारी है अपने
देश को आगे बढ़ाने की”

One thought on “मेजर ध्यानचंद की जीवन परिचय :– हॉकी का जादूगर ।Biography of Major Dhyanchand”
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