शीत युद्व की शुरुआत कब और कहां से हुई थी। और इसके क्या परिणाम रहे पूरे विश्व पर । When and where did the cold war start।

  • शीत युद्ध के बारे में प्रमुख जानकारी
  • शीत युद्ध शब्द की उत्पत्ति किस प्रकार हुई है
  • शीत युद्ध की उत्पत्ति के क्या कारण रहे।
  • पूजीवाद (Capitalism) , साम्यवाद (Communisn)
  • Nato की स्थापना केसे हुई।
  • Non-Aligned Movement (NAM)
  • शीत युद्ध किस प्रकार घटने लगा।
  • भारत में शीत युद्ध का क्या असर रहा ।

शीत युद्ध के बारे में प्रमुख जानकारी
शीत युद्ध जो की संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हुआ। जो 1945 – 1991 तक चला। इस युद्ध के चलते सभी देश दो गुटों में बांट गए। जिसे पश्चिमी ब्लॉक और पूर्वी ब्लॉक कहा जाने लगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका व सोवियत संघ के बीच सीधे तौर पर कभी किसी भी प्रकार का बड़े पैमाने में कोई युद्ध नहीं हुआ ।इसी कारण से इस युद्ध को शीत युद्ध कहा गया।
शीत युद्ध की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के समाप्ति के तुरंत बाद शुरूआत हो गई थी।
1961 के समय चीन व सोवियत संघ के विभाजन के बाद इस युद्ध की गति थोड़ी धीमी हो गई । 1991 में सोवियत संघ के टूटने से यह पूरी तरह से खत्म हो गया था

Note – पश्चिमी ब्लॉक का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ प्रथम देश ने किया और पूर्वी ब्लॉक का नेतृत्व सोवियत संघ के साथ कम्युनिस्ट पार्टी वाले देशों ने किया।

शीत युद्ध शब्द की उत्पत्ति किस प्रकार हुई है
द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने पर अंग्रेजी लेखक जॉर्ज ऑरवेल ने 19 अक्टूबर 1945 में ब्रिटिश अखबार में अपने एक निबंध में शीत युद्ध शब्द का इस्तेमाल किया।

शीत युद्ध की उत्पत्ति के क्या कारण रहे।
शीत युद्ध के शुरुआती समय को हम प्रारंभिक चरण भी कहते हैं जो की 1949 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुरू हुआ। जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका ने पश्चिमी यूरोपीय देशों के साथ मिलकर सोवियत संघ के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया। इसके तहत इन्होंने नाटो की स्थापना की । जो की 1949 में रक्षात्मक समझौता के रूप में बनाया गया था।
अधिकांश इतिहासकार को इस युद्ध की शुरूआत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बताया ।लेकिन कुछ का कहना है इसकी शुरुआत 1917 की अक्टूबर क्रांति से हो गई थीं।
1917 में रूसी क्रांति के में रूस के दो भाग बन चुके थे । जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी की जीत हुई जिन्हें रेट्स कहा गया । दूसरी ओर के भाग को व्हाइट कहा गया। जिन्हे यूएसए , फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम का सपोर्ट प्राप्त था ।जिसके कारण USSR का संबंध USA से बिगड़ गया ।

1– 1922 में USSR की स्थापना हुई । लेकिन इन पश्चिमी देशों ने इसे स्वीकार नहीं किया। 1933 में USA व USSR के बीच संबंध बढ़ाने लगे। उस समय जोज़ेफ स्टालिन USSR के लीडर थे। इन्हें एक तानाशाह के रूप में भी बताया जाता है।

2– द्वितीय विश्व युद्ध द्वितीय की भूमिका
द्वितीय विश्व युद्ध में USA और USSR दोनों एक साथ थे । और ये जर्मनी के खिलाफ खड़े थे लेकिन युद्ध के खत्म होने पर दोनों देशों ने अपने को शक्तिशाली बनाने की तरफ चलने लगे।

[ पूजीवाद (Capitalism) – इसके अंदर एक ऐसी सोसाइटी बनाई जाती है जिसमें उद्योगों पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार होता है तथा इसमें सरकार का ज्यादा नियंत्रण नहीं होता है। इसके अंदर कुछ जगहों में मजदूरों का शोषण होता है जिसके अंदर उनसे जबरदस्ती काम किए जाते हैं।

साम्यवाद (Communisn) – इसके अंदर एक ऐसी सोसाइटी बनाई जाती है जिसके अंदर कोई वर्ग नहीं होता है। तथा इसके अंदर कोई किसी भी प्रकार का उच्च और नीचा नहीं होता है। सभी समान होते हैं इसके अंदर आने वाली सोसाइटी में किसी भी प्रकार की सरकार नहीं होती तथा इसे चलाने के लिए किसी भी प्रकार की करेंसी का यूज नहीं होता। इसके अंदर कोई एक भी मालिक नहीं होता है सभी मालिक होते है। इसके प्रस्तुतकर्ता कार्ल मार्क्स थे।

समाजवाद (Socialism) – यह सोसाइटी कुछ हद तक कम्युनिज्म का पालन करती है पर इसमें सर्वोपरि पर सरकार शासन करती है जो सबको हक प्रदान करती है।

Mixed economy– इसके अंदर हमें यह बताए जाता हैं कि इसके अंदर पूजीवाद और कम्युनिज्म दोनों को अपनाया जाता है। ex– भारत, स्वीडन , फ्रांस
यहां कुछ चीजे सरकार के अंदर आती हैं ।और कुछ चीजों में कोई व्यक्ति विशेष किसी एक कम्पनी का मालिक बन सकता है। ]

3– USA साम्यवाद को कम करने में लग गए।
USA ने पूजीवाद को बढ़ावा देने के लिए पूरे विश्व में USA ने युद्ध में हारे देशों को खर्चा दिया। जिससे वह विनिर्माण कर सके और पूजीवाद की तरफ को बड़े इसे मार्शल प्लान भी कहा गया।

4– ट्रूमन डॉक्ट्रिन 1947 इसके तहत कहा गया कि हम उन देशों को सपोर्ट करेंगे जो साम्यवाद में के खिलाफ हैं उन्हें हर प्रकार के सपोर्ट किया जाएगा। यह प्लान USA के द्वारा लाया गया।

5– Berlingum block – आधे जर्मन में USA का कब्जा था। जो पूजीवाद को बढ़ावा दे रहा था । पर आधे जर्मन में USSR का कब्जा था जो साम्यवाद की तरफ था जहां बर्निंग शहर USA ने USSR से बचाने के लिए उस शहर के चारो ओर से ब्लॉक कर दिया । यह घटना 1948 में हुई ।

Nato की स्थापना केसे हुई।
1949 में USA ने यूरोपीय देशों के द्वारा नाटो की स्थापना की। जिसका मुख्य कारण USSR को यूरोप में आगे बढ़ने से रोकना था।

Note – 1949 में चीन भी साम्यवाद बन गया । इसी साल USSR ने भी न्यूक्लियर हथियार बना दिया था।

6– कोरियन वॉर ( 1950 –53 ) 1950 के बाद कोरिया में दो भागो में गृह युद्ध हो गया जिसके नॉर्थ कोरिया पर USSR का सपोर्ट मिला तथा साउथ कोरिया को USA का सपोर्ट मिला । इस लड़ाई में किसी की जीत नहीं हुई

Note – 1955 में नाटो के खिलाफ एक एक्ट बनाया गया जिसे WARSAW कहा गया क्योंकि यह USSR द्वारा बनाया गया।

इसके बाद USA और USSR के बीच अंतरिक्ष में जाने की रेस लग गई। जिसमे सबसे पहले पहला सेटेलाइट USSR के द्वारा भेजा गया और चंद्रमा में सबसे पहले USA ने कदम रखा।

7– 1956 में हंगेरियन क्रांति में वहां की कम्युनिस्ट सरकार को गिरा दिया गया। पर USSR ने वहां क्रांति करके दोबारा स्थापित कर दिया इसके लिए USSR ने अपने टैंक के भी भेजे थे।

8– 1956 में स्यूज क्राइसिस भी हुआ जिसमें मिस्र (Egypt) के द्वारा स्यूज नहर पर अपना अधिकार किया। जिसके कारण इंग्लैंड, फ्रांस और USA इसके खिलाफ हों गए । पर मिस्र के साथ USSR रहा। इस कारण इंग्लैंड ,फ्रांस और USA को पीछे हटना पड़ा।

Non-Aligned Movement (NAM) इसकी स्थापना 1961 में हुई। इसके प्रमुख लीडर भारत , इंडोनेशिया , मिस्र और यूगोस्लाविया थे। उनके द्वारा यह कहा गया कि हम ना तो USA की तरफ है और ना ही USSR की तरफ है। हम गुटनिरपेक्ष बने रहेंगे जिन्हें तीसरी दुनिया भी कहा गया।

1– पहले दुनिया जिसमें जो USA को सपोर्ट कर रहे थे तथा जहां पूंजीवाद था , इन देशों को पहले दुनिया कहा गया।

2– दूसरी दुनिया जो USSR को सपोर्ट करते थे तथा जिन देशों में कम्युनिस्ट का पालन होता था उन्हें दूसरी दुनिया कहा गया।

3– तीसरी दुनिया जो ना ही USA और ना ही USSR के पक्ष में थे । उन्हें तीसरी दुनिया कहा गया।

शीत युद्ध किस प्रकार घटने लगा।
1970 के बाद शीत युद्ध क्रांति में कमी आई क्योंकि उसे समय USA के राष्ट्रपति चीन आए थे । उसके बाद उनके रिश्तों में बढ़ोतरी बनी जिसके बाद USSR से भी अच्छे रिश्ते बनने लगे। इसके बाद इन्होंने कोई ओपन युद्ध नहीं किया । जिसे साल्ट 1973 के तहत निष्कर्ष निकला । कि हम न्यूक्लियर मिसाइल को कम करेंगे । इसके बाद उनके संबंध अच्छे बढ़ने लगे।

1979 में अफगानिस्तान में कम्युनिस्ट की सरकार बनी जिसके कारण वहां USSR ने अफगानिस्तान के सपोर्ट के लिए अपनी सेवाए को भेजना शुरु कर दिया । जिससे USA नाराज हो गया । तब USA ने वहां पर मुजाहिदीन को को सपोर्ट किया। जिससे वे USSR के खिलाफ बन गए इसमें पाकिस्तान ने भी अमेरिका का साथ दिया।

1980 में USA के नए राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन बनने से उन्होंने सेना के खर्च को बहुत बड़ा दिया। जिसका मुकाबला USSR नहीं कर पाई। 1985 में USSR के लीडर Mikhail Gorbachev बने। इसके बाद शीत युद्ध धीरे-धीरे खत्म होने लगा। इनके आने से

George H. W. Bush जो USA के राष्ट्रपति बने 1989 में । उनके द्वारा यह शीत युद्ध दिसंबर 1989 में खत्म कर दिया गया। कई लोगों द्वारा इसे 1991 कहा गया क्योंकि 1991 में USSR पूरी तरह से टूट गया था। 15 भागों में।

भारत में शीत युद्ध का क्या असर रहा ।
भारत जो NAM ( Non-Aligned Movement ) को फॉलो करता है । यह ना तो USA के साथ था । और ना ही USSR के साथ था। रूस अपने नौसेना को USA के बॉर्डर में लगाना चाहता था। जिसका समुद्री रास्ता श्रीलंका से होते हुए था । जिसके बाद USA ने श्रीलंका को आर्थिक सहायता दी और इकोनॉमी को बढ़ावा दिया तथा इसके बदले श्रीलंका के निचले बंदरगाह ( हंबनटोटा ) को USA ने मांगा USSR की नौसेना पर नजर रखने के लिए। इसके बाद USSR खतरे में आ गया। इस समय USSR ने भारत से सहयता मांगी । इसके बाद भारत सरकार ने श्रीलंका पर गृह युद्ध कर दिया । श्रीलंका के उत्तरी साइट पर तमिल रहा करते थे जिनका संबंध तमिलनाडु से जिसे भारत सरकार का सपोर्ट मिला । जिनका लीडर प्रभाकरण था। श्रीलंका में गृह युद्ध बहुत तेज से बढ़ने लगा । इसके बाद USA को हंबनटोटा बंदरगाह से पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। प्रभाकरण द्वारा श्रीलंका में LTTE ( Liberation Tigers of Tamil Eelam ) संगठन बना दिया गया। जिसकी माग श्रीलंका में अलग देश के माग करने लगा। जिसे भारत सरकार का सपोर्ट मिला। तब श्रीलंका ने भारत से सहायता मांगी तब भारत का श्रीलंका के साथ समझौता हुआ जिसमें USA को पीछे हटाया गया तभी भारत सरकार ने भारतीय सेना को श्रीलंका में भेजा और श्रीलंका में LTTE संगठन को खत्म कर दिया गया। उस समय भारत में राजीव गांधी की सरकार थी। बाद में इन LTTE संगठन वालों के द्वारा राजीव गांधी को मार दिया गया।


इसके बाद USA ने नेपाल को कर्जा देना शुरु कर दिया और नेपाल के इकोनॉमी को बढ़ाया । तब USA ने नेपाल पर अपने सेना के लिए सेना अड्डा मांगा। जिससे वह चीन और भारत में अपनी नजर रखना चाह रहा था। चीन में माओ सतगु की सरकार थी । उन्होंने USA को रोकने के लिए कुछ विद्रोहियों को नेपाल में भेज दिया । उस समय नेपाल में राजतंत्र था जिन लोगों ने नेपाल को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया। इसके बाद नेपाल में से USA को पीछे हटना पडा। इसके बाद नेपाल में यह युद्ध शांत हुआ लेकिन ये विद्रोहियों को चीन ने वापस नही बुलाया ये नेपाल में ही रहने लगें। बाद में यह विद्रोही भारत में छत्तीसगढ़ की तरफ रहने लगे जिन्हें हम नक्सलवादी कहते हैं।

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