सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय किस प्रकार रहा है। Introduction of Savitribai Phule

  • सावित्रीबाई फुले का परिचय किस प्रकार है
  • सावित्रीबाई फुले का प्रारंभिक जीवन
  • आजीविका की शुरुआत किस प्रकार की ।
  • रूढ़िवादी विचार के साथ किस प्रकार रहा सफर।

सावित्रीबाई फुले का परिचय किस प्रकार है
सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षकों के रूप में और एक समाज सुधारक व महिलाओं के अधिकारों को बेहतर बनाने के रूप में इन्होंने अपनी भूमिका निभाई तथा इन्होंने जाति और लिंग के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव और अनुचित व्यवहार को खत्म करने के लिए बहुत प्रयास किया । सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा पर ध्यान दिया ।

सावित्रीबाई फुले का प्रारंभिक जीवन

सावित्रीबाई फुले का इनका जन्म 8 जनवरी 1831 में महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ । सावित्रीबाई की शादी 9 या 10 साल की उम्र में ज्योतिबा फुले के साथ हुई । शादी के बाद सावित्रीबाई ने ज्योतिबा फुले के चचेरी बहन से घर पर ही शिक्षा ली । इसके बाद उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा ग्रहण की।

आजीविका की शुरुआत किस प्रकार की ।

सावित्रीबाई फुले ने अपनी शिक्षा पूरी करने पर उन्होंने सावित्रीबाई फुले ने पुणे में लड़कियों को पढ़ना शुरू कर दिया था । तथा बाद में सावित्रीबाई ने ज्योतिबा फुले की बहन के साथ मिलकर ज्योतिबा फुले ने भिड़ेवाडा में अपना स्कूल शुरू किया। 1851 तक इन्होंने लड़कियों के लिए 3 अलग-अलग स्कूलों को खोला।

रूढ़िवादी विचार के साथ किस प्रकार रहा सफर।
सावित्रीबाई की सफलता से रूढ़िवादी विचारों के लोगों द्वारा विरोध किया जाता था। इसलिए सावित्रीबाई हमेशा एक अलग साड़ी रखती थीं। क्योंकि रूढ़िवादी लोगों द्वारा पत्थर व गोबर फेक जाते थे सावित्रीबाई फुले पर ।
क्योंकि मनुस्मृति व ब्राह्मण ग्रन्थ के अनुसार उनके इस काम को पाप बोला गया है । उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 18 स्कूलों को खोला तथा अलग-अलग जातियों के लोगों को भी पढ़ाया । 1897 में प्ले की महामारी के कारण सावित्रीबाई फुले की मृत्यु हो गई।

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