1917 की रूसी क्रांति का प्रभाव किस प्रकार रहा । इससे पूरे विश्व में क्या असर पडा। Complete information about Russian Revolution

  • रूस की क्रांति के बारे में संक्षिप्त रूप।
  • फ्रांस की तरह रूस की स्थति में विषमता।
  • औद्योगिक क्रांति का प्रभाव रूस में किस प्रकार रहा।
  • रूस में  निकोलस द्वितीय का शासन
  • 1904 में रूस और जापान का युद्ध।
  • प्रथम विश्व युद्ध का क्या असर हुआ
  • पहली क्रांति, रेड गार्ड vs व्हाइट
  • युद्ध के परिणाम कुछ इस प्रकार रहे

रूस की क्रांति के बारे में संक्षिप्त रूप।
रूस की क्रांति का प्रभाव न केवल रूस में पड़ा इसका प्रभाव पूरे विश्व में पड़ा इसके बाद समाज में बहुत बदलाव आए । यह क्रांति निचले वर्ग के लिए एक उम्मीद बनके आइ। यह क्रांति 1970 में हुई थी ।  जो कि दो चरणों में पूरी हुई जिसके पहले चरण को हम फरवरी क्रांति के नाम से जानते हैं, तथा दूसरे चरण को अक्टूबर क्रांति के नाम से जानते हैं।

1– फ्रांस की तरह रूस की स्थति में विषमता।
रूस की क्रांति पर फ्रांस की क्रांति का बहुत प्रभाव रहा क्योंकि फ्रांस की तरह रूस में भी समाज वर्गों में बटा था । जिसमे पहले वर्ग पर समांतर , पादरी तथा दूसरे वर्ग पर व्यापारी ,जमीदार व पूजी पति लोग शामिल थे लेकिन तीसरे वर्ग पर कृषक और मजदूर शामिल थे जिनका शोषण होता था।

2– औद्योगिक क्रांति का प्रभाव रूस में किस प्रकार रहा।
रूस में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत देर से हुई । जहा रूस में किसानों के पास कोई भूमि नहीं थी वे जमीदारों के नीचे दबे थे और उनके अत्याचारों से परेशान थे । इसलिए ये लोग औद्योगीकरण का इंतजार कर रहे थे जिसके बाद ये शहर में जाए तथा वहां आराम से काम करे । लेकिन औद्योगीकरण के शुरू होने से शहरों में भर–भर के लोग आए जिससे शहरों की हालत और घटिया हो गई।  उद्योगों में पूंजीवाद को बढ़ावा दिया गया।  जिसमें मजदूरों और किसानों को जबरदस्ती काम कराया जा रहा था ।  और जार द्वारा जबरदस्ती करो को लगाया जाता था ।  जिससे मजदूर वर्ग बहुत परेशान था।
[ जार – रूस में राजतंत्र का शासन चलता था और वहा के राजाओं को जार कहते थे। ]

3– दार्शनिकों के विचारो का प्रभाव किस प्रकार रहा।
जिस प्रकार फ्रांस में दार्शनिकों व लेखकों ने अपने विचारों से फ्रांस की क्रांति में प्रभाव डाला । ठीक इसी प्रकार रूस के मध्य वर्ग के बुद्धिजीवो के द्वारा – जिन्होंने जार के निरंकुश शासन की निंदा की उन्होंने क्रांति की बात की। इनके द्वारा साम्यवाद को बढ़ावा दिया गया समाज में तथा पूंजीवाद की खत्म करने की बात कही।  जो कि मजदूर वर्ग तथा किसानों के लिए एक माध्यम भी रहा आगे बढ़ने का।

रूस में  निकोलस द्वितीय का शासन
1894 के समय जब अलेक्जेंडर तृतीया की मृत्यु हुई तो जिसके बाद उसके बेटे निकोलस द्वितीय ने उनके इस सत्ता पर अपना अधिकार किया।  जिसके बाद निकोलस द्वितीय ने उसी साल जर्मन प्रिंसेज से शादी कर ली । अब रूस में निकोलस द्वितीय और उसकी पत्नी के द्वारा रूस में शासन किया जा रहा था। जिसमे जार के पास राजपूतिन जैसे सलाहकार थे जिनकी बातों को राजा मानता था।  राजपूतिन खुद को एक चमत्कारी व्यक्ति मानता था । रूस में इन तीनों के द्वारा शासन किया गया दूसरी ओर कार्ल मार्क्स के विचार समाज में बढ़ने लगे जो साम्यवाद की तरफ थे।

कार्ल मार्क्स – कार्ल मार्क्स का कहना था की दुनिया में सभी उत्पादक किसानों और मजदूरों के द्वारा किए जाते हैं इसलिए संपत्ति पर इनका भी हक भी होना चाहिए। ये मजदूरों के शासन करने की बात करते थे । जिसमें सभी वर्गो को बराबर में रखा गया है और इस समाज में किसी का शोषण ना हो। ये  साम्यवाद के विचारों को बढ़ाना चाहते थे और पूंजीवाद के खिलाफ थे।

RSDL (russian social democratic party ) – 1898 में RSDL की स्थापना हुई इस पार्टी का नेतृत्व लेनिन के द्वारा किया गया जिसमें मजदूर वर्ग के लिए एक रोशनी की किरण जगी । क्योंकि ये काल मार्क्स के विचारों से प्रभावित थे जोकि ये एक ऐसा समाज को चाहते थे जिससे सत्ता किसी एक के पास ना हो और  जिसमें लोगों का शोषण ना हो । 1903 में आते-आते RSDL का विभाजन हो गया। जिसमें से दो पार्टी बन गए एक वोल्शेविक पार्टी और दूसरी मेंसविक पार्टी के नाम से आगे आई।

1–वोल्शेविक ( जिसे बहुमत वाली पार्टी कहा गया ) इन्होंने सत्ता पर मजदूर वर्ग का शासन करने की बात कही।
2– मेंसविक ( माइनोरिटी ) इनका मानना था कि सभी वर्ग इस क्रांति में भाग ले। और ये भी   कार्ल मार्क्स के विचारों की बात करते थे।

1904 में रूस और जापान का युद्ध।
1904 में रूस और जापान का युद्ध हुआ इस युद्ध में रूस को हार का सामना करना पड़ा युद्ध के बाद रूस के लोग जार को एक बेकार शासक मानते थे । क्योंकि जापान जैसी छोटे देश ने रूस पर विजय प्राप्त कर ली जो कि रूस के लिए शर्म की बात थी। इसलिए मजदूरों द्वारा जार के खिलाफ शासन का तकता पलट करने की कोशिश की है।

1905 में रूस में एक छोटी सी क्रांति हुई। जिसमे मजदूरों के द्वारा जार के खिलाफ आन्दोलन किया गया जिसमें जार ने मजदूर वर्गों पर गोली चला दी । जिसे हम ब्लडी संडे कहते हैं। इसके बाद पूरे रूस जार के खिलाफ हो गया। जार ने DUMA की स्थापना की जिसमें उन्होंने DUMA के तहत कैबिनेट सदस्य और PM जैसे पदों की स्थापना की।  पर इन पदों पर जार के ही अंडर था।  जिससे वह समय-समय पर भंग कर देता था।
1906 –11 तक PM के पद पर स्टालिपिन थे। जिन्होने मजदूरों के लिए अच्छे कार्य किया जिससे जार को डर लगने लगा की ।  pm को कहीं जनता जार ना बना दे।  इसलिए जार ने स्टालिपिन की हत्या कर दी।  जिसके बाद DUMA से जार ने सभी शक्तियां अपने अंदर कर ली।

प्रथम विश्व युद्ध का क्या असर हुआ

इस युद्ध में प्रथम विश्व युद्ध में काफी मात्रा में सैनिकों की भर्ती किया गया।  जिसमें सैनिकों की सुविधाओं में कोई विशेष ध्यान नहीं दिया ।जिसके बाद उसमें असंतोष पैदा हुआ । युद्ध की वस्तु को तैयार करने के लिए उद्योगों को बंद कर दिया गया । जिसके बाद मजदूर वर्ग बहुत परेशान हो गया। रूस में भूखमरी जैसी समस्या पैदा होने लगी।  युद्ध में 20 लाख सैनिक मारे गए और 80 लाख नागरिकों की मृत्यु होगी । 1970 में भुखमरी की समस्या पैदा हो गई रूस में।

पहली क्रांति – रूस में 8 मार्च 1917 को 50,000 मजदूरों ने सेटपिट्सवर्ग में हड़ताल कर दि।  जिसके कारण जार को अपनी सत्ता छोड़नी पड़ी । जिसके बाद जार का शासन समाप्त हो गया । जार के शासन के बाद जार को हटाने के बाद रूस में शासन DUMA के पास चले गया। इसके बाद शासन DUMA से विभाजित पार्टी मेंसविक दल के PM ( Alexander Kerensky) के पास चले गया। मेंसविक दल के pm अलेक्जेंडर केरेन्स्की ने रूस में अपना शासन स्थापित करने के बाद कहीं गलतियां कि । जिसमें इसने रूस को विश्व युद्ध से रूस को पीछे नहीं किया और ना ही रूस में चुनाव किये।
वोल्शेविक दल के नेता लियोन त्रोत्स्की ने  मेंसविक दल के pm अलेक्जेंडर केरेन्स्की को कहीं सुझाव दिए । इसमें विश्व युद्ध से बाहर निकालने की बात की परंतु मेंसविक दल के नेता ने वोल्शेविक दल के सभी लोगों को गिरफ्तार कर दिया।

इसके बाद रूसी आर्मी यह देखकर बहुत परेशान हो गई । उन्होंने सत्ता अपने हाथों पर रखने की बात कही।  यह देखकर जो मेंसविक दल के pm अलेक्जेंडर केरेन्स्की ने वोल्शेविक दल के नेता से रेड गार्ड की सहायता मांगी।
[ रेड गार्ड – यह एक प्रकार की सेना थी ] इसके बदले मेंसविक दल ने वोल्शेविक दल की आजाद कर दिया।
रूस के समाज में इस समय लेलिन में अपने विचार रखे जिससे पूरा समाज इनसे काफी प्रभावित हुआ। तभी इन्हे वोल्शेविक दल से भी पूरा समर्थन मिला । जिससे ये मेंसविक दल के खिलाफ़ हो गए 24 अक्टूबर 1917 को लेलिन के द्वारा सेटपिट्सवर्ग में सरकारी ऑफिसों पर कब्जा कर दिया गया जिसमें वोल्शेविक के रेड गार्ड का समर्थन मिuला था । लेनिन को देखकर रूस में गृह युद्ध शुरू हो गया । जिसमें कहीं लोग मारे गए यह युद्ध रेड गार्ड और व्हाइट के बीच था।

रेड गार्ड – जिसमें लेनिन और रूस के मजदूर वर्ग के शमिल थे । इन्हे रेट आर्मी भी शामिल थी।
व्हाइट – जिसमे उच्च वर्ग के लोग कुलीन ,सामंत और मेंसविक दल के लोग थे जिन्हे USA , UK  का समर्थन प्राप्त था ।

युद्ध के परिणाम कुछ इस प्रकार रहे
युद्ध के परिणाम के बाद वोल्शेविक दल की जीत हुई तथा इन युद्ध में जार समेत उनके परिवारों की हत्या कर दिया गया।  वोल्शेविक के लोग काल मार्क्स के विचारों से प्रभावित थे उन्होंने ऐसे समाज बनाने की बात कही। जिसमें साम्यवाद के विचारों के साथ आगे बढ़ने कों कहा । इसके बाद पूरी दुनिया में इनके विचार बढ़ने लगे और इससे कही देश इनके साथ आगे आए । अंत में इनके द्वारा 1922 में USSR का गठन का गठन किया ।

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