UCC :- समान नागरिक संहिता क्या है। उत्तराखण्ड में UCC लागू के बाद बदलाव। what is uniform civil code.

  • UCC द्वारा किन विषयों में कानून लाया जाएगा
  • समान नागरिक संहिता ( UCC ) क्या है।
  • UCC केवल उत्तराखंड में ही क्यों ।
  • उत्तराखंड के UCC में क्या-क्या नियम शामिल किए गए हैं
  • सपिंडा विवाह , द्विविवाह
  • किन लोगों पर यह लागू नहीं होगा ।

UCC कानून – यह एक नियम या विधियों का समूह है जो किसी राज्य में लागू होने के बाद वहां लगाया जाता है।

UCC द्वारा किन विषयों में कानून लाया जाएगा
भारत देश में कई सिविल कानूनी विषयों में समानता नहीं है जहां UCC के तहत उन मामलों में समानता लाया गया है। जैसे हिंदू मुस्लिम विवाह , तलाक , बच्चा गोद लेना आदि सम्मिलित हैं।

समान नागरिक संहिता ( UCC ) क्या है।
हमारे देश में अभी भी कई सारे नियमो और कानूनो को अलग-अलग धर्म के हिसाब से लगाया जाता है। जहां ये कानून लिंग के आधार पर भी विभिन्नताएं किए गए हैं । जिसमें अलग-अलग धर्म का विवाह से संबंधित तथा अपने धर्म के हिसाब से तलाक और बच्चा का गोद लेना सम्मिलित है । इन सभी विषयों में समानता को लाने के लिए समान नागरिक संहिता को लाया गया है जो कि अभी के समय में गोवा के बाद उत्तराखंड में लाया गया है
। जिसके तहत अब इन विषयों पर किसी भी प्रकार से कोई धार्मिक विषमताएं या लिंग के हिसाब से भेदभाव नहीं किया जाता बल्कि UCC के बाद सभी लोगों को समान रूप से लागू किया जाएगा।

UCC केवल उत्तराखंड में ही क्यों ।
संविधान के चौथा भाग में राज्य के नीति निर्देशक तत्व में अनुच्छेद 44 में UCC के बारे में जिक्र किया गया है । जिसके अंदर आने वाले सभी प्रावधान राज्य अपने हिसाब से लागू करेगा । इसमें उन्हें पूर्णता छूट दी गई है तथा यह कानून केवल उसी राज्य में ही लागू किया जाएगा अन्य राज्य में यह लागू नहीं होगा।

उत्तराखंड के UCC में क्या-क्या नियम शामिल किए गए हैं।
इन नियमो की सीमाएं केवल उत्तराखंड तक ही रहेगी अन्य राज्यों में यह लागू नहीं होगा।

*विवाह की कानूनी आयु – जिसके तहत पुरुषों की आयु 21 वर्ष तथा महिलाओं की आयु 18 वर्ष तय की गई है ।
( POCSO – के तहत नाबालिकों के विवाह पर प्रतिबंध लगाया जाता था । पहले )

*सपिंडा विवाह – इस नियम के तहत लड़का अपने 5 पुस्तो में तथा लड़की अपनी 3 पुस्तो में विवाह नहीं कर सकती । उन्हें मानता नहीं दी जाएगी।

*द्विविवाह – अपने पहले जीवनसाथी के रहते आप दूसरा विवाह नहीं कर सकते।

*Live in relationship – अगर कोई व्यक्ति और महिला लिव इन रिलेशनशिप में रहते हैं तो उन्हें पंजीकरण करना होगा इसके बाद उन्हें मान्यता दी जाएगी।

नोट– सभी विवाहों को अब कानूनी रूप से पंजीकरण करना होगा । इसके बाद

  • तलाक में UCC के तहत अब पूरे उत्तराखंड में बिना अदालत के तलाक नहीं मान्य होगा और ट्रिपल तलाक , हलाल जैसे चीजों को खारिज किया गया है।

किन लोगों पर यह लागू नहीं होगा ।
उत्तराखंड के कई जनजाति समूह के अपने कुछ नियम रहे हैं तथा प्राचीन समय से उनकी अपनी धार्मिकता चली आ रही है तथा उनके समानताओं को न बिगड़ने के कारण । उत्तराखंड के जनजाति समुदाय पर UCC लागू नहीं होगा जिसमें थारू , जोनसारी , बुक्सा , राजी , भोटिया आदि सम्मिलित है।

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